मुंबई 12 मार्च 2026 – सहकारी बैंकों में लंबे समय से एक ही व्यक्ति के डायरेक्टर पद पर बने रहने की परंपरा अब बदल सकती है। सरकार के एक आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सहकारी बैंक में कोई भी व्यक्ति लगातार 10 साल से ज्यादा समय तक डायरेक्टर पद पर नहीं रह सकेगा। यह नियम बैंकिंग कानून के प्रावधानों के आधार पर लागू माना गया है और इसका असर आने वाले समय में कई सहकारी बैंकों के प्रबंधन पर पड़ सकता है।

इस संबंध में जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सहकारी बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की संरचना और उनकी पात्रता को लेकर नियम
Banking Regulation Act, 1949
के प्रावधानों के अनुसार तय किए जाएंगे। पत्र में विशेष रूप से धारा 10A और धारा 56 का उल्लेख किया गया है, जिनके तहत बैंक के बोर्ड की संरचना और डायरेक्टरों की पात्रता निर्धारित की जाती है।

सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार यदि किसी सहकारी बैंक का डायरेक्टर लगातार 10 वर्षों तक पद पर रहा है और उसकी यह अवधि 1 अगस्त 2025 या उसके बाद पूरी होती है, तो वह व्यक्ति आगे उस पद पर बने रहने के लिए अयोग्य माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि कई बैंकों में लंबे समय से पद संभाल रहे डायरेक्टरों को अब पद छोड़ना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम का उद्देश्य सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और प्रबंधन में नई भागीदारी को बढ़ावा देना है। कई जगहों पर एक ही व्यक्ति वर्षों तक बोर्ड में बने रहते हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया सीमित हो जाती है। ऐसे में समय सीमा तय करने से बैंक प्रशासन में बदलाव आने की संभावना है।

इस फैसले का असर महाराष्ट्र सहित उन सभी राज्यों के सहकारी बैंकिंग सेक्टर पर पड़ सकता है जहां लंबे समय से डायरेक्टर पद पर एक ही लोग बने हुए हैं। आने वाले समय में कई बैंकों में बोर्ड की संरचना बदलने और नए चुनाव होने की संभावना भी जताई जा रही है।

फिलहाल संबंधित विभागों और बैंक प्रबंधन को इस नियम के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय करनी होगी। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में सहकारी बैंकिंग सेक्टर में प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।