जलगांव, 11 मार्च 2026 – देश में चल रहे एलपीजी संकट का असर अब छोटे शहरों तक भी महसूस किया जाने लगा है। महाराष्ट्र के जलगांव में भी गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। शहर के कई गैस पंपों पर ऑटो रिक्शा की कतारें लगने लगी हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में ऑटो गैस आधारित ईंधन पर चलते हैं और सप्लाई में देरी के कारण चालकों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
दरअसल 7 मार्च 2026 को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद दिल्ली में 14.2 किलो का सिलेंडर करीब 913 रुपये तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक गैस सप्लाई पर पड़े असर के कारण हुई है। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर देश के बाजार पर पड़ता है।
देश के कई बड़े शहरों—जैसे मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई—में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस की कमी के कारण कई जगह किचन का संचालन प्रभावित हुआ है और उद्योग संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग भी की है।
इसी राष्ट्रीय स्थिति का असर अब जलगांव में भी दिखाई देने लगा है। शहर के कुछ गैस पंपों पर ऑटो रिक्शा चालकों की लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। कई चालकों का कहना है कि गैस भरवाने में अधिक समय लग रहा है, जिससे उनकी रोज़मर्रा की कमाई प्रभावित हो रही है। कुछ ऑटो चालक सड़कों के किनारे अपने वाहन खड़े करके गैस उपलब्ध होने का इंतजार करते भी दिखाई दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक ऊर्जा संकट और मिडिल ईस्ट का तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर पेट्रोल और डीजल की मांग पर भी पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल पंपों पर भी भीड़ बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने और गैस उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, साथ ही सिलेंडर बुकिंग के बीच का अंतर भी बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है ताकि जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगाई जा सके।
हालांकि प्रशासन की ओर से किसी बड़े संकट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जलगांव सहित कई शहरों में दिखाई दे रही कतारें यह संकेत जरूर दे रही हैं कि स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।
