भुसावल, 20 मई 2026 – महाराष्ट्र के जळगांव जिले में बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। अब भुसावल शहर से एक ऐसी महिला को पकड़ा गया है, जो कथित रूप से कई वर्षों से फर्जी पहचान के सहारे भारत में रह रही थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि महिला ने न केवल भारतीय दस्तावेज बनवा लिए थे, बल्कि भारतीय पासपोर्ट के जरिए विदेश यात्रा भी कर चुकी थी।
भुसावल बाजारपेठ पुलिस स्टेशन की टीम ने दीनदयाल नगर इलाके में रहने वाली महिला को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान उसकी असली पहचान फरीदा बेगम मोहम्मद खान के रूप में सामने आई, जो मूल रूप से बांग्लादेश के पीरोजपुर जिले की रहने वाली बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, भारत आने के बाद उसने अपना नाम बदलकर “जस्मिन बी मोहम्मद खान” रख लिया था और स्थानीय स्तर पर सामान्य नागरिक की तरह रह रही थी।
जांच एजेंसियों के मुताबिक महिला ने शुरुआती पूछताछ में खुलासा किया कि वह करीब वर्ष 2009 में बांग्लादेश से अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुई थी। बताया जा रहा है कि नदी मार्ग और नाव की मदद से पश्चिम बंगाल सीमा में प्रवेश करने के बाद वह रेल मार्ग से महाराष्ट्र पहुंची थी।
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर तकनीकी जांच की। जांच में बांग्लादेश के कई नंबरों से लगातार संपर्क, वीडियो कॉल और चैटिंग के सबूत मिलने का दावा किया गया है। इसके अलावा मोबाइल में मौजूद दस्तावेजों से उसकी मूल पहचान से जुड़े संकेत भी मिले।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि महिला ने कथित तौर पर रिश्तेदारों और अन्य दस्तावेजों का उपयोग कर भारतीय पहचान पत्र तैयार करवाए। इनमें राशन कार्ड, Aadhaar कार्ड, वोटर आईडी, PAN कार्ड और बैंक दस्तावेज शामिल बताए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाकर वह वर्ष 2023 में बांग्लादेश जाकर वापस भारत लौट आई थी।
फिलहाल पुलिस ने महिला के खिलाफ विदेशी नागरिक और इमिग्रेशन से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब जांच एजेंसियां उन लोगों और नेटवर्क की तलाश में जुटी हैं, जिन्होंने कथित तौर पर उसे फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में मदद की।
जळगांव पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई संदिग्ध व्यक्ति लंबे समय से रह रहा हो या किसी के दस्तावेजों को लेकर संदेह हो, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस प्रशासन को दें।
