मुंबई से मीडिया एसोसिएशन ऑफ इंडिया की संस्थापक अध्यक्षा शीतल हरीश करदेकर ने केंद्र की चार नई श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी मसौदा नियम-2026 पर अपनी विस्तृत आपत्तियां और सुझाव भेजे हैं। 23 जून 2026 को प्रधान सचिव, श्रम विभाग, महाराष्ट्र सरकार को ईमेल के माध्यम से छह महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्ताव सौंपे गए, जिनकी प्रतिलिपि श्रम आयुक्त और सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालक को भी भेजी गई।
इन सुझावों में प्रमुख रूप से 'महाराष्ट्र श्रमिक पत्रकार कल्याण बोर्ड' की स्थापना, महिला किसान विधेयक के अनुरूप श्रमिक की परिभाषा, रात में काम करने वाली महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, त्रिपक्षीय समिति की जगह बहुपक्षीय समिति, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा ठेका कर्मचारियों के आर्थिक शोषण पर रोक जैसी मांगें शामिल हैं।
करदेकर का कहना है कि श्रमिक पत्रकारों के लिए सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, पीएफ-ईएसआई, पेंशन, दुर्घटना बीमा और मानसिक स्वास्थ्य अवकाश जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही महिला किसानों, असंगठित श्रमिकों, पत्रकारों और दिव्यांगों को श्रम नीति निर्माण में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की है कि इन छह प्रमुख सुझावों, विशेषकर महिला किसान विधेयक के अनुरूप प्रावधान और श्रमिक पत्रकार कल्याण बोर्ड को शामिल किए बिना मसौदा नियमों को अंतिम रूप न दिया जाए। साथ ही सरकार इन प्रस्तावों पर लिखित जवाब और अमल की समयसीमा भी घोषित करे।