नई दिल्ली, 8 अप्रैल 2026 – अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दो हफ्तों के लिए हुए सीज़फायर ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ा असर डाला है। सीज़फायर की घोषणा के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब 15 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक बाजार में राहत का माहौल बन गया है।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा केंद्र है Strait of Hormuz, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। हाल के दिनों में इस मार्ग पर खतरा बढ़ने के कारण सप्लाई प्रभावित होने की आशंका थी, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आई थी। लेकिन अब सीज़फायर के बाद इस अहम समुद्री रास्ते के फिर से सुरक्षित होने की उम्मीद ने बाजार को राहत दी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जैसे ही यह संकेत मिला कि तेल की सप्लाई सामान्य हो सकती है, कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। इस गिरावट का असर केवल कमोडिटी मार्केट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला है। खासकर एविएशन, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को इससे बड़ा फायदा हो सकता है।

हालांकि, जानकार इसे स्थायी राहत नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह सीज़फायर फिलहाल केवल दो हफ्तों के लिए है और अगर इस दौरान फिर से तनाव बढ़ता है या समझौता टूटता है, तो तेल की कीमतें दोबारा तेजी पकड़ सकती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बाजार की नजर अमेरिका और ईरान के संबंधों पर टिकी रहेगी।

भारत जैसे देशों के लिए यह खबर राहत भरी हो सकती है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतें नीचे बनी रहती हैं, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कमी संभव है, जिससे आम लोगों को राहत मिल सकती है।