जलगांव, 19 मार्च 2026 –
जलगांव स्थित जैन हिल्स में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आधुनिक कृषि तकनीकों का निरीक्षण किया और ठिबक सिंचाई के जरिए विभिन्न फसलों की बढ़ती उत्पादकता को करीब से समझा। इस दौरान उन्होंने कहा कि यदि देशभर में वैज्ञानिक खेती और जल प्रबंधन को अपनाया जाए तो भारत कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनकर वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन सकता है।
जैन इरिगेशन कंपनी द्वारा विकसित जैन हिल्स पर फलों, सब्जियों और अनाज की विभिन्न फसलों के प्रायोगिक मॉडल प्रस्तुत किए गए। कंपनी के चेयरमैन अशोक जैन ने मंत्री का स्वागत करते हुए पिछले कई वर्षों से चल रहे प्रयोगों की जानकारी दी। खासतौर पर ठिबक सिंचाई के जरिए धान की खेती को लेकर मंत्री ने आश्चर्य जताया, क्योंकि आमतौर पर धान के लिए पारंपरिक जलभराव पद्धति को ही प्रभावी माना जाता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि ठिबक प्रणाली से धान की खेती करने पर उत्पादन में वृद्धि होती है, दानों की गुणवत्ता बेहतर होती है और फसल गिरने की समस्या भी कम होती है। इस पर मंत्री चौहान ने भरोसा जताते हुए कहा कि भविष्य में धान उत्पादक राज्यों में इस तकनीक को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे।
इस दौरे के दौरान मंत्री ने हल्दी, अदरक, संतरा, अनार और आम जैसी फसलों के टिश्यू कल्चर से तैयार पौधों का भी निरीक्षण किया। ग्रीनहाउस में उगाई जा रही केले की फसल का अवलोकन करते हुए उन्होंने क्लाइमेट स्मार्ट खेती को समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और बढ़ते तापमान के बीच किसानों को सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में खेती की ओर बढ़ना होगा।
इसके अलावा हाइड्रोपोनिक्स, एरोपोनिक्स, वर्टिकल फार्मिंग और क्लाइमेट न्यूट्रल बीज उत्पादन जैसी उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन भी किया गया, जिसे मंत्री ने किसानों के लिए लाभकारी बताया।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे, सांसद स्मिता वाघ, विधायक सुरेश भोळे, जिला कलेक्टर रोहन घुगे सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी मौजूद रहे।
मंत्री चौहान ने अंत में कहा कि आधुनिक सिंचाई, विज्ञान और तकनीक आधारित खेती को अपनाकर ही भारत कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।