जलगांव शहर के काव्यरत्नावली चौक पर रविवार, 15 मार्च 2026 की सुबह ऑर्किड नेचर फाउंडेशन की ओर से विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) के उपलक्ष्य में एक विशेष पर्यावरण जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुबह 7 से 8:30 बजे के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में नागरिकों को माटी के परळ (पक्षियों के लिए पानी के बर्तन) और कपड़े की थैलियां वितरित कर पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त जीवन का संदेश दिया गया।
फाउंडेशन के अध्यक्ष आर. एन. कुलकर्णी और उपाध्यक्ष आर. एन. पाटील के नेतृत्व में यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस उपक्रम को सफल बनाने में मैक टेक कंपनी के डायरेक्टर सुधीर चौधरी, उद्योजक संतोष इंगळे, नगरसेविका वंदनाताई इंगळे और डॉ. पराग जहागिरदार ने आर्थिक सहयोग दिया। कार्यक्रम के दौरान सुधीर चौधरी और डॉ. पराग जहागिरदार का गुलाब पुष्प और पक्षियों के घरटे देकर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि फाउंडेशन की आजीवन सदस्या 76 वर्षीय विजया नेरकर विशेष रूप से नाशिक से जलगांव पहुंचीं। वे सामाजिक कार्य के तहत पुरानी साड़ियों से कपड़े की थैलियां बनाकर लोगों में बांटती हैं। प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के उद्देश्य से उन्होंने स्वयं 300 से अधिक कपड़े की थैलियां इस कार्यक्रम के लिए उपलब्ध कराईं। उनके पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक योगदान को देखते हुए ऑर्किड नेचर फाउंडेशन ने रोटेरियन सुधीर चौधरी के हाथों उन्हें “पर्यावरण मित्र पुरस्कार” देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में फाउंडेशन के सचिव सुनिता महाजन, कोषाध्यक्ष नितीन अट्रावलकर, डॉ. अमित चौधरी, डॉ. विकास पाटील, नानासाहेब वाघ, दीपक तांबोळी, सुनील पवार, उमेश इंगळे, राजेंद्र गोसावी, अतुल कोल्हे, वसंत सोनवणे, जयंत राणे, विलास बरडे, विजय पाटील सहित कई सदस्य और नागरिक उपस्थित रहे।
सिर्फ एक घंटे में ही करीब 300 माटी के परळ नागरिकों में वितरित कर दिए गए। मॉर्निंग वॉक के लिए आए महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने इस पहल का उत्साह के साथ लाभ लिया।
कार्यक्रम का एक और आकर्षण “चिऊताई का घरटा” रहा, जिसे गौरैया पक्षियों के लिए सुरक्षित निवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। गौरैयों की घटती संख्या को ध्यान में रखते हुए बनाए गए इन घरटों को नागरिकों ने खूब पसंद किया और कई लोगों ने इन्हें अग्रिम रूप से बुक भी कराया।
ऑर्किड नेचर फाउंडेशन का यह उपक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास था, बल्कि लोगों को प्रकृति और पक्षियों के संरक्षण के लिए आगे आने का संदेश भी देता है।
