जलगांव के तरसोद-पालधी बायपास मार्ग के कुछ हिस्सों के निर्माण के बाद ही सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्य में खामियों की ओर इशारा किया है। अब ठेकेदार पर कार्रवाई और जांच की मांग तेज हो रही है।

हालांकि सवाल केवल ठेकेदार तक सीमित नहीं है। यदि निर्माण कार्य के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारी, थर्ड पार्टी ऑडिटर, तकनीकी विशेषज्ञ, सांसद और मंत्री नियमित निरीक्षण करते, तो क्या यह स्थिति पैदा होती? करोड़ों रुपये की लागत वाले प्रोजेक्ट में गुणवत्ता की निगरानी करना सभी संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है।

निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता जांच, सामग्री परीक्षण, साइट निरीक्षण और प्रगति की समीक्षा की व्यवस्था होती है। ऐसे में यदि सड़क कुछ ही समय में खराब हो जाती है, तो जवाबदेही केवल ठेकेदार की नहीं बल्कि निगरानी करने वाली पूरी व्यवस्था की भी बनती है।

अब जनता जानना चाहती है कि निर्माण के समय निरीक्षण किसने किया, गुणवत्ता प्रमाणपत्र किस आधार पर दिया गया और यदि खामियां थीं तो उन्हें समय रहते रोका क्यों नहीं गया। मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है।