महाराष्ट्र के जलगांव में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 55 लाख 50 हजार रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के मुख्य सरगना को एमआईडीसी पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान संदेश दशरथ शिरसाठ के रूप में हुई है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि संदेश शिरसाठ खुद को न्यायाधीश (जज) बताकर लोगों पर रौब जमाता था। उसके पास से न्यायाधीश का फर्जी पहचान पत्र और अंबर बत्ती लगी कार भी बरामद की गई है, जिनका इस्तेमाल वह लोगों का विश्वास जीतने के लिए करता था।

इस गिरोह ने मंत्रालय में नौकरी दिलाने का झांसा देकर तीन उच्चशिक्षित युवकों से 55.50 लाख रुपये ठग लिए थे। पीड़ितों में मेहरुण निवासी होटल व्यवसायी कुणाल नाईक के दो भाई और उनका एक मित्र शामिल हैं।

इस मामले में इससे पहले पुलिस स्वाती जुनागडे, स्वप्नील जयस्वाल और अमित जयस्वाल को गिरफ्तार कर चुकी है। स्वप्नील जयस्वाल खुद को मंत्रालय के निर्माण विभाग का अधिकारी बताता था और सचिव स्तर तक पहचान होने का दावा कर युवाओं से बड़ी रकम वसूलता था।

पोलीस निरीक्षक बबन आव्हाड और सहायक निरीक्षक गणेश वाघ के नेतृत्व में जांच टीम ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर मुख्य आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान भी उसने खुद को जज बताकर पुलिस पर रौब जमाने की कोशिश की, लेकिन जांच में उसका झूठ बेनकाब हो गया।

फिलहाल पुलिस इस गिरोह के एक अन्य सदस्य, जो खुद को वकील बताकर लोगों को ठगने में शामिल था, उसकी तलाश में जुटी है। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह ने कई अन्य लोगों को भी इसी तरह सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगा हो सकता है।