महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के भूम तालुका में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने एक बड़े सिंथेटिक दूध रैकेट का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि नीरमा डिटर्जेंट पाउडर, पाम ऑयल, चीनी और विभिन्न रसायनों की मदद से नकली दूध तैयार कर बाजार में बेचा जा रहा था।

प्राथमिक जांच के अनुसार, पिछले छह महीनों में करीब 2.3 करोड़ लीटर नकली दूध का उत्पादन और वितरण किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 9 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

जांच अधिकारियों का कहना है कि डिटर्जेंट में मौजूद सोडियम बाइकार्बोनेट का उपयोग दूध की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और वसा (फैट) की मात्रा अधिक दिखाने के लिए किया जाता था, जिससे दूध संग्रह केंद्रों को धोखा दिया जा सके।

इस मामले में सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, लेकिन सभी आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। एफडीए और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह का मिलावटी दूध लिवर, किडनी और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए इसका सेवन विशेष रूप से खतरनाक माना जा रहा है।