छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य, दूरदृष्टि, नेतृत्व और न्यायप्रियता से विद्यार्थियों को प्रेरणा देने के उद्देश्य से मेहरूण स्थित श्री संत ज्ञानेश्वर प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में ‘वीर गाथा 6.0’ के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।
‘वीर गाथा’ परियोजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को वीरता और शौर्य की प्रेरणादायी कहानियों से जोड़ना तथा उनके माध्यम से साहस, जिम्मेदारी और मूल्यबोध विकसित करना है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन के प्रेरणादायी प्रसंगों का अध्ययन किया और उनसे मिलने वाली सीख को अपने शब्दों में प्रस्तुत किया। विशेष आकर्षण रहा ‘वीर से मिली मुझे सीख’ उपक्रम, जिसमें विद्यार्थियों ने शिवाजी महाराज के जीवन से अपने लिए एक महत्वपूर्ण मूल्य चुना।
किसी विद्यार्थी ने साहस, तो किसी ने नेतृत्व, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, न्याय, महिला सम्मान, स्वाभिमान, निर्णय क्षमता और जनता की सेवा को अपनी सीख बताया। विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि इन मूल्यों को वे अपने दैनिक जीवन में किस तरह अपनाएंगे।
कार्यक्रम में शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़े प्रेरणादायी प्रसंगों का कथन, भाषण, ऐतिहासिक घटनाओं का प्रस्तुतिकरण और मूल्य आधारित गतिविधियां आयोजित की गईं। विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि शौर्य केवल युद्धभूमि में पराक्रम दिखाना नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़ा होना, सही निर्णय लेना, कर्तव्य ईमानदारी से निभाना और समाज के प्रति जिम्मेदारी स्वीकार करना भी है।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने ‘मैं शिवाजी महाराज से क्या सीखूंगा?’ विषय पर संकल्प भी लिए। स्कूल में अनुशासन का पालन, माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान, महिलाओं और बालिकाओं का सम्मान, स्वच्छता बनाए रखना, पर्यावरण की रक्षा करना और जिम्मेदार नागरिक के रूप में व्यवहार करना—इन संकल्पों को विद्यार्थियों ने अपनाया।
इस आयोजन ने इतिहास, मूल्य शिक्षा, देशभक्ति और नागरिक जिम्मेदारी को व्यवहारिक शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से साहस, नेतृत्व, सामाजिक जिम्मेदारी, महिला सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रभावना जैसे मूल्यों को दैनिक जीवन से जोड़ने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन मुख्याध्यापक मुकेश नाईक, पर्यवेक्षिका शीतल कोली और रूपाली आव्हाड ने किया। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन प्रेरणादायी संदेश के साथ हुआ—“शिवरायों का शौर्य जानें, उनके विचार समझें और उनके मूल्यों को अपने आचरण में अपनाएं।”