जलगांव (मेहरूण): दशहरे पर रावण के पुतले का दहन करने के साथ समाज में व्याप्त बुरी सोच को भी समाप्त करना आवश्यक है। इसी सामाजिक संदेश के साथ जलगांव के मेहरूण स्थित श्री संत ज्ञानेश्वर प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय ने महिला सशक्तिकरण पर आधारित एक अनूठी पहल की।
‘रावण के दस सिर, दस सवाल और महिला सशक्तिकरण का एक संकल्प’ की अवधारणा के माध्यम से छात्राओं ने महिलाओं से जुड़े सामाजिक मुद्दों पर सवाल उठाकर समाज को आत्मचिंतन करने का संदेश दिया।रावण के दस सिरों पर बेटियों की शिक्षा, स्त्री सम्मान, महिला सुरक्षा, स्त्री-पुरुष समानता, कन्या भ्रूण हत्या, परिवार में समानता, आर्थिक आत्मनिर्भरता, बाल विवाह, निर्णय लेने की स्वतंत्रता और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने जैसे विषयों को प्रस्तुत किया गया।
छात्राओं ने सवाल उठाया कि यदि बेटा पढ़ता है तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है, फिर बेटी के शिक्षित होने से पूरे समाज का विकास क्यों नहीं हो सकता? लड़कों को स्वतंत्रता और लड़कियों को प्रतिबंधों में रखने का भेदभाव कब समाप्त होगा? देवी की पूजा करने वाला समाज महिलाओं का अपमान कैसे सहन कर सकता है?
इस पहल के माध्यम से महिलाओं को समान अवसर, सुरक्षित वातावरण और अपने जीवन से जुड़े निर्णय स्वयं लेने की स्वतंत्रता देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
विद्यालय ने पारंपरिक दशहरा उत्सव को सामाजिक जागरूकता से जोड़ते हुए विद्यार्थियों में समानता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया।
‘रावण को जलाने से अधिक जरूरी है, विचारों में बसे रावण को जलाना!’ यही इस पहल का प्रमुख संदेश रहा। विद्यालय की इस गतिविधि ने दशहरे को केवल बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व तक सीमित न रखते हुए महिला सम्मान और समानता के संकल्प से जोड़ने का प्रयास किया।