महाराष्ट्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए अनिवार्य हिंदी भाषा दक्षता परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य प्रशासन द्वारा जारी नवीनतम आदेश के अनुसार, अब सरकारी कर्मचारियों को इस परीक्षा में उत्तीर्ण होना आवश्यक नहीं होगा, जिससे एक दशक पुरानी नीति में बदलाव आया है। यह फैसला सरकारी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और कर्मचारियों पर से अनावश्यक प्रशासनिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।
पूर्व में, राज्य के सरकारी कर्मचारियों को अपनी सेवा के दौरान हिंदी भाषा परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य था। कई कर्मचारी इसे अनावश्यक मानते थे, विशेषकर जब राज्य की प्राथमिक आधिकारिक भाषा मराठी है और अधिकांश सरकारी कामकाज उसी में संपादित होता है। इस अनिवार्यता को अक्सर कर्मचारियों के लिए एक अतिरिक्त बोझ के रूप में देखा जाता था, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से ही मराठी में दक्ष थे। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने विभिन्न कर्मचारी संगठनों से प्राप्त अभ्यावेदनों पर गंभीरता से विचार करने के बाद इस नीति की गहन समीक्षा की। सरकार का मानना है कि इस कदम से कर्मचारियों को अपनी प्राथमिक जिम्मेदारियों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी, बजाय इसके कि वे एक अतिरिक्त भाषा आवश्यकता को पूरा करने में समय और संसाधन लगाएं। यह संशोधन राज्य के भाषाई संदर्भ को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस निर्णय से राज्यभर के हजारों कर्मचारियों को सीधे राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अब पदोन्नति या सेवा निरंतरता के लिए इस परीक्षा को पास करने की चिंता नहीं होगी। यह एक व्यापक प्रशासनिक सुधार का हिस्सा है।
इंडिया आपतक न्यूज़
KADWA LEKIN SACH
