जलगांव के पाळधी–तरसोद बायपास के बंद होने के बाद शहर और आसपास बढ़ी भारी वाहनों की आवाजाही के बीच महज 23 दिनों में पांच लोगों की मौत के गंभीर मामले में आखिरकार जलगांव तालुका पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। नगरसेवक अरविंद देशमुख ने इस पूरे मामले को लेकर लगातार प्रशासन को लिखित शिकायतें, ज्ञापन और चेतावनियां दी थीं। ऐसे में मामला दर्ज होना उनके लगातार किए गए प्रयासों का पहला ठोस परिणाम माना जा रहा है।
उपलब्ध शिकायत के अनुसार अॅग्रो इन्फ्रास्ट्रक्चर डेव्हलपर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के एमडी शैलेंद्र सिंघल, कंपनी के जीएम दत्ता और संबंधित साइट अधिकारी सहित कुल तीन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, मोटर वाहन अधिनियम तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बायपास बंद होने के बाद देशमुख ने पहले ही जताई थी चिंता
पाळधी–तरसोद बायपास बंद होने के बाद भारी वाहनों को शहर के रास्ते से मोड़े जाने के कारण संभावित हादसों को लेकर अरविंद देशमुख ने शुरुआत से ही आवाज उठाई थी।
8 अगस्त को उन्होंने NHAI प्रशासन को पत्र देकर पाळधी–तरसोद बायपास की कम से कम एक लेन दोनों दिशाओं के यातायात के लिए तत्काल शुरू करने की मांग की थी। उस समय ही उन्होंने हादसों और संभावित मौतों का मुद्दा उठाते हुए प्रशासन को तत्काल सुरक्षा उपाय करने की चेतावनी दी थी।
इसके बाद जैसे-जैसे हादसों और मौतों का आंकड़ा बढ़ता गया, देशमुख ने NHAI और जिला प्रशासन के समक्ष दोबारा लगातार मुद्दा उठाया।
उन्होंने तत्काल रोड सेफ्टी ऑडिट, हाईवे के गड्ढों की युद्धस्तर पर मरम्मत, रिफ्लेक्टर, रंबलर, दिशा-सूचक और खतरे के संकेतक, पर्याप्त रोशनी, भारी वाहनों के सुरक्षित नियमन तथा दुर्घटना संभावित स्थानों पर तत्काल सुरक्षा उपाय करने की मांग की थी।
इसके साथ ही सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच और संबंधित अधिकारियों तथा ठेकेदारों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की गई थी।
चार मौतों के बाद कहा था—“पांचवें बळी का इंतजार मत कीजिए”
चार नागरिकों की मौत के बाद अरविंद देशमुख ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा था—“अब पांचवें बळी का इंतजार मत कीजिए।”
लेकिन इसके बाद भी एक और नागरिक की मौत हो गई और महज 23 दिनों में मृतकों की संख्या पांच तक पहुंच गई।
देशमुख ने सड़क की बदहाल स्थिति और गड्ढों, अपर्याप्त सड़क सुरक्षा व्यवस्था, भारी वाहनों के गलत नियोजन, बायपास बंद होने के बावजूद सुरक्षित वैकल्पिक यातायात व्यवस्था नहीं होने तथा खतरनाक स्थानों पर आवश्यक संकेत और सुरक्षा उपायों की कमी जैसे मुद्दे प्रशासन के सामने लगातार रखे थे।
अब उनका कहना है कि पुलिस जांच में इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच होना जरूरी है।
“मामला दर्ज हुआ, इसका मतलब यह नहीं कि मामला खत्म हो गया”
अरविंद देशमुख ने कहा कि केवल मामला दर्ज होना इस पूरे प्रकरण का अंत नहीं है। जांच में यह भी सामने आना चाहिए कि किस अधिकारी या संबंधित व्यक्ति को किस तारीख को संभावित खतरे की जानकारी दी गई थी, उसके बाद क्या कार्रवाई की गई, क्या कार्रवाई नहीं की गई और यदि नहीं की गई तो क्यों नहीं की गई।
उन्होंने यह भी मांग की है कि बायपास बंद होने के बाद शहर में भारी वाहनों की आवाजाही का नियोजन किसकी जिम्मेदारी थी, सड़क सुरक्षा की जांच किसे करनी थी, आवश्यक सुरक्षा उपाय समय पर क्यों नहीं किए गए और संबंधित ठेकेदार या अधिकारियों की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं—इन सभी पहलुओं की जांच की जाए।
“पांच मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं, पांच उजड़े परिवार हैं”
अरविंद देशमुख ने कहा कि “पांच बळी सिर्फ पांच आंकड़े नहीं हैं, बल्कि पांच उजड़े हुए परिवार हैं। जलगांव के लोगों की जान की कीमत बेहद महत्वपूर्ण है। मामला दर्ज होना सिर्फ पहली सीढ़ी है।”
उन्होंने मांग की कि उनके द्वारा पहले दिए गए प्रत्येक ज्ञापन और शिकायत को जांच में शामिल किया जाए और उपलब्ध सबूतों के आधार पर जिनकी जिम्मेदारी तय होती है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
देशमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “अब छठी मौत हमें मंजूर नहीं है।”
पांचों मृतकों के परिवारों को न्याय, हाईवे पर तत्काल सुरक्षा व्यवस्था और कानूनी रूप से जिम्मेदार पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होने तक अपना संघर्ष जारी रखने की बात अरविंद देशमुख ने कही है।
