जलगांव की अदालत ने चेक बाउंस के एक महत्वपूर्ण मामले में परभणी के एक वितरक को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड को 30 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।

मामला करीब 26 लाख 32 हजार 846 रुपये के चेक से जुड़ा है। आरोप है कि पांडुरंग ट्रेडिंग कंपनी के सूर्यकांत सिताराम कछवे ने वर्ष 2015 में जैन इरिगेशन के साथ हुए आर्थिक लेन-देन की उधारी चुकाने के लिए यह चेक दिया था। कंपनी ने चेक बैंक में जमा किया, लेकिन वह अनादरित होकर वापस आ गया।

इसके बाद जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड ने जलगांव न्यायालय में फौजदारी प्रकरण क्रमांक 4321/2015 दाखिल किया। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने 20 अगस्त 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी ठहराया।

अदालत ने आरोपी को एक साल की जेल की सजा सुनाई और कंपनी को 30 लाख रुपये मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया। चेक की मूल राशि से अधिक मुआवजे के आदेश के कारण इस फैसले को आर्थिक लेन-देन और चेक से जुड़े मामलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस मामले में जैन इरिगेशन की ओर से अधिवक्ता निशांत अत्रे ने पैरवी की, जबकि आरोपी की ओर से अधिवक्ता चंद्रकांत सिताराम कछवे ने पक्ष रखा।