सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें रेलवे की समानांतर पटरियों को फूल-मालाओं से सजाकर पूजा-अर्चना की जाती दिखाई दे रही है। वीडियो को साझा करते हुए दावा किया गया कि यह अनुष्ठान ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए किया गया है।
हालांकि, इस दावे पर रेलवे कर्मचारियों और ट्रैक मेंटेनरों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रही रस्म कोई “रेलवे ट्रैक की शादी” नहीं है, बल्कि विश्वकर्मा पूजा जैसी पारंपरिक धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। रेलवे और औद्योगिक क्षेत्रों में कई कर्मचारी किसी बड़े मरम्मत या रखरखाव कार्य की शुरुआत से पहले उपकरणों और कार्यस्थल की पूजा करते हैं।
रेलवे ट्रैक मेंटेनरों के अनुसार, इस पूजा का उद्देश्य सुरक्षा उपकरणों और कार्य के प्रति सम्मान प्रकट करना होता है। इसका ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए किसी विशेष धार्मिक उपाय से सीधा संबंध नहीं है। कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने की भी आलोचना की।
ऐसे वीडियो पहले भी कई बार वायरल हो चुके हैं। हर बार यह बहस छिड़ जाती है कि आस्था और परंपरा को किस तरह देखा जाए तथा रेलवे सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों में वैज्ञानिक उपायों और नियमित ट्रैक निरीक्षण की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे सुरक्षा मुख्य रूप से नियमित ट्रैक निरीक्षण, समय पर रखरखाव, आधुनिक तकनीक और कर्मचारियों की सतर्कता पर निर्भर करती है। वहीं धार्मिक अनुष्ठान कई लोगों के लिए सांस्कृतिक और भावनात्मक आस्था का विषय बने रहते हैं।
