महाराष्ट्र कांग्रेस द्वारा एनसीपी नेता सुनेत्रा पवार के संदर्भ में कथित तौर पर "गूंगी गुड़िया" शब्द के इस्तेमाल के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को जलगांव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने कांग्रेस भवन पर मोर्चा निकाला।

मोर्चे में एनसीपी के जिला अध्यक्ष संजय पवार, पूर्व मंत्री गुलाबराव देवकर, विनोद देशमुख, योगेश देसले सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। नेताओं ने महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़े ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

वहीं कांग्रेस ने इस विरोध का जवाब गांधीगिरी के अंदाज में दिया। कांग्रेस नेताओं ने आंदोलनकारियों को गुलाब के फूल भेंट कर उनका स्वागत किया। इस घटना को कई लोग "नहले पर दहला" के रूप में भी देख रहे हैं।

दरअसल "गूंगी गुड़िया" शब्द भारतीय राजनीति में नया नहीं है। इतिहास के अनुसार 1966 में प्रधानमंत्री बनने के बाद इंदिरा गांधी को उनके राजनीतिक विरोधियों और कांग्रेस के तत्कालीन सिंडिकेट नेताओं द्वारा इसी शब्द से संबोधित किया गया था। हालांकि बाद में इंदिरा गांधी ने अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाकर इस धारणा को गलत साबित कर दिया।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीति में इस्तेमाल होने वाली भाषा और महिला सम्मान के मुद्दे पर बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र में विचारों की लड़ाई मर्यादित भाषा के साथ लड़ी जानी चाहिए और सभी दलों को सार्वजनिक जीवन में भाषा की गरिमा बनाए रखने पर विचार करना चाहिए।